कमला नेहरु गैस राहत अस्पताल की चौथी मंजिल पर मरीजों की डायलिसिस शुरू हो गई है। डायलिसिस रूम में टेक्नीशियन और डॉक्टर्स की निगरानी में डायलिसिस की जा रही है। बीएमएचआरसी के बंद हो जाने के बाद यहां पर अचानक डायलिसिस कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इसके चलते डॉक्टर्स ने दो शिफ्ट में डायलिसिस करने का फैसला लिया है। ताकि किडनी के मरीजों की ज्यादा से ज्यादा डायलिसिस हो सके। कमला नेहरु गैस राहत अस्पताल के अधीक्षक डॉ एमएल बंजारा ने बताया कि 29 नए मरीज बीएमएचआरसी से डायलिसिस के मिले हैं। सरकार से मशीनें बढ़ाने और संविदा पर नए डॉक्टर्स को तैनात करने का प्रस्ताव भेजा गया है। अब तक सुबह 8 से 2 बजे तक डायलिसिस कर रहे थे, लेकिन अब शाम चार से रात 8 बजे तक इसे बढ़ाया गया है।
सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन
ओपीडी में आने वाले मरीजों की सोशल डिस्टेंसिंग के लिए गोले बनाए गए हैं। इधर, अशोका गार्डन निवासी उर्वशी का दावा है कि अस्पताल में बहुत सारी अव्यवस्थाएं हैं, जिस वक्त डायलिसिस के लिए बुलाया जाता है। उस समय डायलिसिस शुरू नहीं होता है, ऐसा कई बार उनके साथ हो चुका है। उनकी मां विद्या की डायलिसिस बीएमएचआरसी में होती थी। लेकिन सरकार ने उसे कोविड सेंटर बना दिया है। इसलिए अब डायलिसिस के लिए कमला नेहरु गैस राहत अस्पताल आना पड़ता है।
और इधर शाम तक नहीं उठा कचरा
कमला नेहरु अस्पताल से निकलने वाला कचरा हमीदिया अस्पताल की छात्राओं के लिए बने गर्ल्स हॉस्टल के सामने रखे कंटेनर में भर दिया गया है। लेकिन देर रात तक यह कचना नहीं उठा। इस पर अस्पताल के अधीक्षक डॉ एमएल बंजारा का कहना है कि रोजाना समय पर यह कचरा उठ जाता था, लेकिन आज क्यों नहीं उठा।
कमला नेहरू में मेडिकल स्टॉफ
- विशेषज्ञ -10
- मेडिकल ऑफिसर - 5
- संविदा डॉक्टर्स - 20
- इंटर्न पीजी स्टूडेंट्स - 4
- नर्सिंग स्टाफ - 15
- ओपीडी असिस्टेंट - 4